लुडविग गुट्टमैन का जीवन परिचय। Sir Ludwig Guttmann Biography in Hindi – Gyaani Mind

Sir Ludwig Guttmann Google Doodle

लुडविग गुट्टमैन का जीवन परिचय। Sir Ludwig Guttmann Biography in Hindi – Gyaani Mind

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Professor Sir Ludwig Guttmann Google Doodle: आज का गूगल डूडल, लुडविग गुट्टमैन के सम्मान में जारी किया हैं। लुडविग गुट्टमैन ने ही पैरालिम्पिक गेम्स की शुरुआत की थी। उन्हें पैरालिम्पिक गेम्स के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। आप अगर इंटरनेट पर “Ludwig Guttmann in Hindi” लिखकर सर्च करेंगे तो हिंदी में आपको अनगिनत आर्टिकल्स मिल जायेंगे और हर किसी में आपको कुछ ना कुछ नया ही पढ़ने को मिलेगा। तो आइये विस्तार से जानते है “प्रोफेसर सर लुडविग गुटमैन” के बारे में –

लुडविग गुट्टमैन की जीवनी। बायोग्राफी (Ludwig Guttmann Wikipedia Biography in Hindi)

लुडविग गुट्टमैन का जन्म 3 जुलाई, 1899 को टोस्ट में एक जर्मन-यहूदी परिवार में हुआ था। वह एक मशहूर जर्मन-ब्रिटिश न्यूरोलॉजिस्ट थे, रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) की चोटों के इलाज की विशेषज्ञता के चलते वह पूरे जर्मनी में मशहूर थे, जिन्होंने स्टोक मैंडविल गेम्स की स्थापना की जो विकलांग लोगों (PWD) के लिए खेल का एक आयोजन है। इंग्लैंड में पैरालंपिक खेल विकसित हुए।

पैरा-ओलंपिक गेम्स के जरिए डॉ. सर लुडविग गट्टमन ने दिव्यांगों के लिए जो किया, उसे पूरी दुनिया कभी नहीं भूल पायेगी। साल 1960 में पहली बार पैरा-ओलंपिक गेम्स का आयोजन किया गया। उन्होंने इन गेम्स के ज़रिये विकलांग लोगों को उस बुरे सपने से उभरने में मदद की जो उनका पीछा शायद पूरी ज़िंदगी नहीं छोड़ता। इन गेम्स की बदौलत दिव्यांग लोगों को एक नई दिशा मिली और वह निराशा से उबकर बेहतर इंसान बने।

1961 में, गुटमैन ने विकलांगों के लिए ब्रिटिश स्पोर्ट्स एसोसिएशन की स्थापना की, जिसे बाद में इंग्लिश फेडरेशन ऑफ डिसएबिलिटी स्पोर्ट के रूप में जाना जाने लगा।

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लुडविग गुट्टमैन करियर (Ludwig Guttmann Career)

1948 में, पहली बार उन्होंने दिव्यांग लोगों के लिए एक आर्चरी (Archery) मुकाबले का आयोजन कराया था। पूरे विश्व में यह इस तरह का पहला आयोजन था, जो कि बाद में पैरा-ओलंपिक गेम्स के नाम से जाना जाने लगा। सर लुडविग गुटमैन के अस्पताल का नाम “स्टोक मैंडविल” था और पैरा-ओलंपिक गेम्स को भी शुरुआत में यही नाम दिया गया था।

गुट्टमैन ने अप्रैल 1918 में Breslau विश्वविद्यालय में अपनी चिकित्सा की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने 1919 में फ्रीबर्ग विश्वविद्यालय में स्थानांतरित कर दिया और 1924 में डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन प्राप्त किया।

1933 तक, गुट्टमैन व्रोकला, पोलैंड में एक न्यूरोसर्जन के रूप में काम कर रहे थे और विश्वविद्यालय में भाषण दे रहे थे। फ़ॉस्टर के पहले सहायक के रूप में सफलतापूर्वक काम करने के बावजूद, गुट्टमैन को 1933 में नूर्नबर्ग कानूनों के तहत उनकी विश्वविद्यालय की नियुक्ति और उनकी नौकरी से निष्कासित कर दिया गया था और उनका शीर्षक “क्रैंकनबेहैंडलर” (जो बीमारों का इलाज करता है) में बदल गया था।

पहला नेशनल स्पाइनल सर्जरी सेंटर (First National Spinal Surgery Centre)

सितंबर 1943 में, ब्रिटिश सरकार ने गुट्टमैन को बकिंघमशायर के स्टोक मैंडविल अस्पताल में नेशनल स्पाइनल इंजरी सेंटर स्थापित करने के लिए कहा गया था। यह पहल रॉयल एयर फ़ोर्स की ओर से रीढ़ की चोट वाले पायलटों के उपचार और पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। केंद्र 1 फरवरी 1944 को खोला गया, रीढ़ की हड्डी की चोटों के इलाज के लिए यूनाइटेड किंगडम की पहली विशेषज्ञ इकाई और गुट्टमैन को इसका निदेशक नियुक्त किया गया। उनका मानना ​​​​था कि खेल घायल सैन्य कर्मियों के पुनर्वास के लिए चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जिससे उन्हें शारीरिक शक्ति और आत्म-सम्मान का निर्माण करने में मदद मिलती है।

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लुडविग गुट्टमन की मृत्यु (Ludwig Guttmann Death)

1961 में, गुटमैन ने इंटरनेशनल मेडिकल सोसाइटी ऑफ़ पैरापलेजिया की स्थापना की जिसका नाम बाद में बदल कर इंटरनेशनल स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी (ISCoS) कर दिया गया। वह समाज के उद्घाटन अध्यक्ष थे, एक पद जो उन्होंने 1970 तक धारण किया। वे पैरापलेजिया पत्रिका के पहले संपादक बने। उन्होंने 1966 में नैदानिक ​​कार्य से संन्यास ले लिया लेकिन खेल के साथ वह आखिर तक जुड़े रहे।

अक्टूबर 1979 में गुटमैन को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया और 18 मार्च 1980 को 80 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

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(Content Source: Wikipedia)

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