डॉ. अम्बेडकर क्यों थे इतने महान – Some Inspiring and Interesting things about Dr. B. R. Ambedkar

डॉ. अम्बेडकर क्यों थे इतने महान – Some Inspiring and Interesting things about Dr. B. R. Ambedkar

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कौन थे डॉ. भीम राव अम्बेडकर? डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने भारत को क्या दिया?

एक व्यक्ति जिसे संस्कृत सिर्फ इसलिए नहीं पढ़ने दी जाये क्यूँकि वो जाती से ब्राह्मण नही है!

जो लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से रिसर्च करके लौटा हो और उसे भारत आने पर छुआ-छूत का सामना करना पड़े!

जिसे चपरासी फाइल फैंक कर देता हो ताकि उसे उसका स्पर्श ना करना पड़े!

जिसकी कुर्सी जहाँ रखी है उसे धोकर पवित्र किया जाता है!

”I like the religion that teaches liberty, equality, and fraternity.”

-Dr. B. R. Ambedkar

एक व्यक्ति जिसे पानी पीने के लिए उस घड़े का उपयोग नहीं करने दिया जाता जिससे ऑफिस के बाकी तमाम लोग पीते हैं क्यूँकि उसके स्पर्श मात्र से वो जल अपवित्र हो जायेगा! ऐसा व्यक्ति आगे चल कर जाती-प्रथा उन्मूलन के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देता है और भारत का वो संविधान लिखता है जिसकी बदौलत आज हम अपने-अपने अधिकारों के लिए लड़ पाते हैं!

उस व्यक्ति का नाम है डॉ. भीम राव अम्बेडकर!

जन्म और शिक्षा

14 अप्रैल 1891, ये वो तारीख है जब बाबा साहेब आंबेडकर का जन्म आज के मध्य प्रदेश के महू में हुआ था! एक महान परिवार में पैदा हुए थे, पिता उस समय फ़ौज में नौकरी करते थे लेकिन पिता के फ़ौज में होने के बावजूद ऐसा नहीं था की डॉ. अम्बेडकर को बचपन में असप्रेक्षिता का सामना करना पड़ा. लेकिन डॉ. अम्बेडकर के बौद्धिक गुण कुछ ऐसे थे की वो उन्हें 1912 में बी. ए. की डिग्री हाँसिल करवाते हैं और अपनी लगन की वजह से डॉ. अम्बेडकर अमेरिका जाकर पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति हाँसिल करते हैं!

यहाँ तक के New York की Columbia University से लेकर उन्होंने London में कानून की पढ़ाई भी की! इसके अलावा वो London School of Economics से भी पढ़े! जब भारत आये तो अंग्रेज़ों का ध्यान उनकी अकादमिक उपलब्धियों पर पड़ा और अंग्रेज़ों को उनमे एस्प्रेक्ष्यों का भावी प्रतिनिधि दिखाई दिया!

“I measure the progress of a community by the degree of progress which women have achieved.”

Dr. B. R. Ambedkar

सोच का आधार

डॉ. अम्बेडकर के बारे में कुछ रोमांचक बातें
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आपको यहाँ बता दें की परंपरा को लेकर डॉ. अम्बेडकर की जो समझ थी वो बहुत ही वैज्ञानिक दृष्टि के आधार पर बनी थी! धर्मशास्त्र की प्रासंगिक और समय के अनुकूल व्याख्या पर उनकी आपत्ति नही थी लेकिन वो कहते थे की आखिर किसी शास्त्र का वो केंद्रीय तर्क कैसे आप नज़रअंदाज़ कर सकते हैं जो अपने आप में अपरिवर्तनीय रहता है! यानि आपको ये तो देखना ही होगा कि उसमे क्या छोड़ा गया है, कहाँ पर बल दिया गया है और उसकी बुनियादी समझ क्या है यानी उस धर्म का बुनियादी रुझान आखिर है क्या!

डॉ. अम्बेडकर मानते थे की जाती-प्रथा के केंद्र में पवित्रता और अपवित्रता की अवधारणाएं हैं जिनके बिना छुआ-छूत की प्रथा रुक ही नहीं सकती! अपनी पुस्तक ‘’ANNIHILATION OF CASTE’’ मे अम्बेडकर ने सुझाव दिया की अंतर-जातीय विवाहो को प्रोत्साहन देकर और अछूतों को पुरोहित बनाकर हिन्दू धर्म को उसकी बुराई से छुटकारा दिलाया जा सकता है!

इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने महार-सत्याग्रह किया और मंदिर प्रवेश की मुहिमों का आयोजन किया! अछूतों के लिए अलग राजनैतिक दायरा विकसित करने के लिए अम्बेडकर ने बहुत से प्रयोग किये!

“We are Indians, firstly and lastly.”

-Dr. B. R. Ambedkar

साउथबोरोह (SouthBorough) कमिटी

आपको 1919 में मताधिकार प्रदान करने के लिए बनाई गयी एक कमिटी – साउथबोरोह (SouthBorough) कमिटी याद होगी! भारतीयों को अलग-अलग प्रांतो की असेंबली में चुनावों के लिए मतदान के अधिकार मिल सके, इसके लिए ये कमिटी थी! इस कमिटी में जिन लोगों से सलाह मांगी थी, उनमे डॉ. अम्बेडकर भी शामिल थे!

वो डॉ. अम्बेडकर ही थे जिन्होंने अस्प्रेक्ष्यों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल और आरक्षित सीटों की व्यवस्था की मांग उठाई थी! वो अम्बेडकर ही थे, जिन्होंने अछूतों के तत्कालीन नेतृत्व, जो की उस समय दलित था, उसे खारिज करते हुए दावा किया था की अछूतों की बागडोर उन्ही के बीच से निकले किसी व्यक्ति के हाथ में होनी चाहिए!

साल 1932 में दूसरी गोलमेस (Golmace) कांफ्रेंस में भाग लेने का निमंत्रण मिला, तब तक उनकी लोकप्रियता जिस रूप से आगे बढ़ रही थी ये उसी का परिणाम था! London में इस सम्मलेन में उन्होंने अलग निर्वाचन मंडल के प्रशन पर महात्मा गाँधी से जमकर लोहा लिया! दरअसल, गाँधी मानते थे की छुआ-छूत हिन्दुओं का अंदरूनी मामला है और अलग निर्वाचन मंडल से हिन्दू धर्म में विभाजन हो जायेगा! लेकिन अंग्रेज़ों ने अम्बेडकर की मांग को मान लिया था! महात्मा गाँधी ने इसके बाद येरवदा (Yervada) जेल में आमरण अनशन शुरू कर दिया! डॉ. अम्बेडकर ने अपनी मांग वापस ले ली!

”Life should be greater rather than long.”

-Dr. B. R. Ambedkar

अपनी पुस्तकों में छुआ-छूत के उद्गम पर विचार डाला

साल 1936 में अम्बेडकर ने Independent Labour Party की स्थापना की और किसानो, मजदूरों और अछूतों के व्यापक मोर्चे को आकार दिया! उसकी मांगे थी की बेगार और बंधुआ प्रथा ख़त्म की जाए, जंगल और प्रति-ज़मीन खेतीहार मज़दूरों में बाँटी जाए और उनका मेहनताना बढ़ाया जाए! उन्होंने अछूतों को मज़दूरों में सामान-वर्ग हैसियत के साथ शामिल करने का भी अभियान चलाया जिसमे उन्हें बहुत ज़्यादा सफलता हाथ नहीं लगी!

फिर साल 1942 में डॉ. अम्बेडकर ने All-India Scheduled Caste Foundation का गठन किया, जिसमे तीन बातें आप देखें तो महत्वपूर्ण थी! एक थी लोकतंत्र के प्रति अटूट लगाव होना! दो दलीय शासन प्रणाली की वकालत करना और दलितों को हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसी ताकतों से दूर रहने की सलाह देना! इसी तरह डॉ. अम्बेडकर की पुस्तक है ”Who were THE SHUDRAS ?” इसमें उन्होंने चौथे वरन की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला और अपनी एक अन्य पुस्तक ”The Untouchables – A Thesis on the Origin of Untouchability” के ज़रिये छुआ-छूत के उद्गम पर विचार डाला!

“In Hinduism, conscience, reason, and independent thinking have no scope for development.”

-Dr. B. R. Ambedkar

संविधान निर्माता – डॉ. अम्बेडकर

डॉ. अम्बेडकर के बारे में कुछ रोमांचक बातें
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बाबा साहेब अम्बेडकर ने मुस्लिम लीग और अलग पाकिस्तान की माँग की आलोचना भी की थी! इसके अलावा जब संविधान सभा का गठन हुआ तो एक सदस्य के रूम में संविधान (Constitution) का मसौदा (Masauda) तैयार करने वाली कमिटी का उन्हें चेयरमैन नियुक्त किया गया! इस मसौदा कमिटी में उनकी भूमिका इतनी बड़ी थी की अम्बेडकर को आज संविधान निर्माता की संज्ञा दी जाती है! संविधान में समाज सुधारों के लिए एक अनुकूल रूप-रेखा तय की गयी थी! ख़ास तौर से असप्रेक्षिता को समाप्त घोषित करने और जाती, नस्ल वा लिंग के आधार पर होने वाले भेदभावों को निशुद्ध घोषित करके इस संविधान में समाज सुधार के लिए एक अनुकूल रूप-रेखा तय की गयी थी!

“The relationship between husband and wife should be one of closest friends.”

Dr. B. R. Ambedkar

डॉ. अम्बेडकर की अंतिम रचना

अम्बेडकर भारतीय समाज की तमाम विकृतियों को मुकम्मल तौर पर ख़त्म करने के लिए कृत-संकल्प थे! इसीलिए जनवरी 1950 में उन्होंने विवाह और तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक सम्बन्धी प्रावधान तय करने के लिए एक हिन्दू कोड बिल में संशोधन का अभियान शुरू किया! उनका कहना था की ये कानून हिन्दू समाज में लम्बे सुधारो का साधन बनना चाहिए!

लेकिन नेहरू इस बात से चिंतित थे की कांग्रेस के रूढ़िवादी नेता इन रेडिकल सुधारो की वजह से दूर न हो जाये! इसलिए नेहरू ने अम्बेडकर के प्रस्तावों पर ख़ामोशी बनायी रखी और इसके बाद अम्बेडकर ने सर्कार से इस्तीफा दे दिया! अम्बेडकर उस वक़्त कानून मंत्री थे! इसके बाद डॉ. अम्बेडकर बुद्ध धर्म की तरफ मुड़ गए! उनकी अंतिम रचना है ”The Buddha and his Dhamma”. वो इसी बदलाव पर केंद्रित थे! ये किताब उनके मरने के बाद प्रकाशित हुई थी! इस से पहले साल 1956 में दशहरे के दिन नागपुर में एक विशाल जन-समूह के सामने डॉ. अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म अंधकार किया! जब उन्होंने बौद्ध धर्म ग्रहण किया तब उनके साथ हज़ारों समर्थक मौजूद थे!

“I solemnly assure you that I will not die as a Hindu.”

-Dr. B. R. Ambedkar

डॉ. अम्बेडकर का निधन

6 दिसंबर 1956 को डॉ. अम्बेडकर का देहांत हो गया! यानी अगर आप देखें, डॉ. अम्बेडकर एक प्रखर राजनेता थे, संगठक थे, एक बहुत ही अनुशासन वाले विद्वान थे! दलित समाज के उद्धारक होने के साथ-साथ भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता भी थे! ये उनकी ऐतिहासिक भूमिका का नतीजा है की आज हम उन पर बात कर रहे हैं!

डॉ. अम्बेडकर पर कुछ सवाल:

  1. जब गाँधी ने येरवदा जेल में पृथक निर्वाचन मंडल के विरोध में अनशन किया था तो डॉ. अम्बेडकर ने जिस कागज़ (पैक्ट) पर हस्ताक्षर किये थे, उस पैक्ट या कागज़ को किस नाम से जाना जाता है? यानी जो समझौता हुआ था, उस समझौते को किस नाम से जाना जाता है?
  2. डॉ. अम्बेडकर ने किस अनुछेद को संविधान की आत्मा कहा है?

नीचे कमेंट बॉक्स में इसके उत्तर ज़रूर दें!

(Content Source: Youtube: Dhyeya IAS Channel)

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